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  • संग्रह संख्या: 355
  • वस्तु: स्तम्भ का ऊपरी भाग
  • काल: 3वीं शताब्दी ई.पू.

मौर्य सम्राट अशोक (272-232 ईसा पूर्व) द्वारा निर्मित यह स्तम्भ शीर्ष (चक्रध्वज) मौर्यकला की श्रेष्ठतम कृति और भारत का राष्ट्रीय चिन्ह है। अशोकस्तम्भ (उत्खनन स्थल पर विद्यमान) के इस शीर्ष पर चार सिंहो की समवेत आकृति बनी है। ऊपर का चक्र अब टूट गया हैं, वह भगवान बुद्ध द्वारा प्रवर्तित धर्मचक्र का प्रतीक है। चार दिशाओं में उन्मुख सिंह ‘शाक्य सिंह‘ बुद्ध के तथा चारों ओर फैले बौद्व धर्म एवं संघ के द्योतक है। सिंह जिस गोलाकार मण्ड (फलक) पर उत्कीर्ण है उस पर चार ‘महापशु‘ अर्थात गज, सिंह, अश्व और वृषभ बने हैं जिनके बीच-बीच में चक्र अंकित है। ये जनमानस में जागरूक धर्म के प्रतीक हैं। बुद्ध ने सारनाथ में आकर प्रथम उपदेश दिया एवं बौद्ध संघ की स्थापना कीयह चक्रध्वज उसी का कलात्मक प्रतीक है।